“आत्मिक सुख ही सर्वश्रेष्ठ सुख है” आचार्य विशुद्धसागर जी महाराज का धर्मोपदेश “भोग में शांति नहीं, योग में शाश्वत आनंद है”
K
khabar harpal
11 अगस्त 2026
लेख सारांश
दिल्ली/इंदौर। दिगंबर जैन श्रमण, संस्कृति के उन्नायक महाश्रमण पट्ट आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी गुरुदेव ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि ब्रह्मांड में सबसे श्रेष्ठ सुख यदि कोई है तो वह आत्मिक सुख है। आत्मिक सुख शाश्वत और निरंतर होता है। इसके लिए किसी बाह्य साधन या सामग्री की आवश्यकता नहीं होती। आचार्य...
मूल लेख पढ़ें
यह खबर khabarharpal.in से ली गई है। पूरी खबर पढ़ने के लिए नीचे दिए बटन पर क्लिक करें।



