ताज़ा खबर:
भारत ने अंतरिक्ष में नया कीर्तिमान बनाया  ❯  संसद में बजट सत्र शुरू  ❯  भारत ने क्रिकेट विश्वकप जीता  ❯  शेयर बाजार नई ऊंचाई पर  ❯  नई शिक्षा नीति लागू  ❯  कैंसर की नई दवा तैयार
अच्छाशब्द
Google Ad 728×60
राजनीति

डाकघर में गबन के वर्षों बाद भी जमापूंजी वापसी का इंतजार

द
दैनिक भास्कर
26 सितंबर 2026

सलारपुर शाखा डाकघर से जुड़े ग्रामीण खाताधारकों की जमा राशि के गबन का मामला वर्षों बाद भी पूरी तरह नहीं सुलझ सका है। वर्ष 2013 में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद हुई विभागीय जांच में तत्कालीन शाखा डाकपाल कामिनी कुमारी को दोषी ठहराते हुए निलंबित किया गया था। कुछ खाताधारकों की राशि ब्याज सहित लौटाने की विभागीय स्वीकृति तो दी गई, लेकिन कई प्रभावित खाताधारक आज भी अपनी जमा पूंजी मिलने की राह देख रहे हैं। इससे ग्रामीणों में भारी निराशा और आक्रोश है। मामला वर्ष 2011 से 6 अगस्त 2013 के बीच का है। तत्कालीन सहायक डाक अधीक्षक (पूर्वी अनुमंडल, खगड़िया) हरिमोहन झा के बयान पर 11 दिसंबर 2013 को परबत्ता थाना कांड संख्या 284/13 दर्ज किया गया था। प्राथमिकी के अनुसार ग्रामीणों द्वारा जमा कराई गई राशि खातों में तो दर्ज की गई, लेकिन सरकारी खजाने में जमा नहीं हुई। मामले में कामिनी कुमारी, उनके पति राकेश मंडल और परबत्ता डाकपाल सहित तीन लोगों पर प्राथमिकी दर्ज हुई थी। राकेश मंडल को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भी भेजा गया था।वर्ष 2022 में जिला परिषद सदस्य जयप्रकाश यादव ने डीएम और डाक विभाग को आवेदन देकर यह मुद्दा फिर उठाया। उन्होंने तत्कालीन डाककर्मी कामिनी कुमारी पर 2009 से 2014 के बीच ग्रामीण खाताधारकों के करीब 25 लाख रुपए के गबन का आरोप लगाया था। उन्होंने विशेष शिविर लगाकर दावों के पारदर्शी सत्यापन और ब्याज सहित राशि लौटाने की मांग की थी। बेगूसराय डाक प्रमंडल द्वारा 29 अगस्त 2017 को जारी पत्र में सलारपुर बीओ के बचत खाता संख्या 684117 (खाताधारक कुमार सानू, पिता महेंद्र प्रसाद सिंह, सलारपुर) के 1,800 रुपए के गबन की पुष्टि का उल्लेख है। विभाग ने राशि व देय ब्याज खाते में बहाल करने की स्वीकृति दी थी।वहीं सुभाष पोद्दार एवं पूनम देवी के आरडी खाता संख्या 75742 में कुल 10,400 रुपए जमा थे, जिसकी राशि सरकारी खाते में जमा नहीं हुई थी। विभाग ने 2,000 रुपए और अद्यतन ब्याज बहाली की स्वीकृति दी थी। ग्रामीणों का कहना है कि स्वीकृति के बावजूद कई खाताधारकों को अब तक भुगतान नहीं मिला है। ग्रामीणों के अनुसार यह डाकघर अंग्रेजों के समय से चल रहा है। कई स्थानों पर संचालित होने के बाद वर्तमान में इसे भरसो के पंचायत सरकार भवन में चलाया जा रहा है, जहां सुविधाओं की भारी कमी है। यहां शाखा डाकपाल और सहायक शाखा डाकपाल के दोनों पद रिक्त हैं। वर्ष 2013 में डाकपाल के निलंबन के बाद से कामकाज प्रभार के भरोसे है, जबकि सहायक डाकपाल सेवानिवृत्त हो चुके हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि नए खाते खोलने का दबाव तो रहता है, लेकिन गबन की राशि के भुगतान में तेजी नहीं दिखाई जा रही। दस्तावेज वाले स्वीकृत मामलों में होगा भुगतान सलारपुर डाकघर में गबन का मामला हाल ही में संज्ञान में आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह मामला फिलहाल सीबीआई के स्तर पर है। जिन खाताधारकों के भुगतान को विभागीय स्वीकृति मिल चुकी है और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध हैं, उनके भुगतान की प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जाएगी।

डाकघर में गबन के वर्षों बाद भी जमापूंजी वापसी का इंतजार
#dainikbhaskar
लेख सारांश

सलारपुर शाखा डाकघर से जुड़े ग्रामीण खाताधारकों की जमा राशि के गबन का मामला वर्षों बाद भी पूरी तरह नहीं सुलझ सका है। वर्ष 2013 में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद हुई विभागीय जांच में तत्कालीन शाखा डाकपाल कामिनी कुमारी को दोषी ठहराते हुए निलंबित किया गया था। कुछ खाताधारकों की राशि ब्याज सहित लौटाने की विभागीय स्वीकृति तो दी गई, लेकिन कई प्रभावित खाताधारक आज भी अपनी जमा पूंजी मिलने की राह देख रहे हैं। इससे ग्रामीणों में भारी निराशा और आक्रोश है। मामला वर्ष 2011 से 6 अगस्त 2013 के बीच का है। तत्कालीन सहायक डाक अधीक्षक (पूर्वी अनुमंडल, खगड़िया) हरिमोहन झा के बयान पर 11 दिसंबर 2013 को परबत्ता थाना कांड संख्या 284/13 दर्ज किया गया था। प्राथमिकी के अनुसार ग्रामीणों द्वारा जमा कराई गई राशि खातों में तो दर्ज की गई, लेकिन सरकारी खजाने में जमा नहीं हुई। मामले में कामिनी कुमारी, उनके पति राकेश मंडल और परबत्ता डाकपाल सहित तीन लोगों पर प्राथमिकी दर्ज हुई थी। राकेश मंडल को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भी भेजा गया था।वर्ष 2022 में जिला परिषद सदस्य जयप्रकाश यादव ने डीएम और डाक विभाग को आवेदन देकर यह मुद्दा फिर उठाया। उन्होंने तत्कालीन डाककर्मी कामिनी कुमारी पर 2009 से 2014 के बीच ग्रामीण खाताधारकों के करीब 25 लाख रुपए के गबन का आरोप लगाया था। उन्होंने विशेष शिविर लगाकर दावों के पारदर्शी सत्यापन और ब्याज सहित राशि लौटाने की मांग की थी। बेगूसराय डाक प्रमंडल द्वारा 29 अगस्त 2017 को जारी पत्र में सलारपुर बीओ के बचत खाता संख्या 684117 (खाताधारक कुमार सानू, पिता महेंद्र प्रसाद सिंह, सलारपुर) के 1,800 रुपए के गबन की पुष्टि का उल्लेख है। विभाग ने राशि व देय ब्याज खाते में बहाल करने की स्वीकृति दी थी।वहीं सुभाष पोद्दार एवं पूनम देवी के आरडी खाता संख्या 75742 में कुल 10,400 रुपए जमा थे, जिसकी राशि सरकारी खाते में जमा नहीं हुई थी। विभाग ने 2,000 रुपए और अद्यतन ब्याज बहाली की स्वीकृति दी थी। ग्रामीणों का कहना है कि स्वीकृति के बावजूद कई खाताधारकों को अब तक भुगतान नहीं मिला है। ग्रामीणों के अनुसार यह डाकघर अंग्रेजों के समय से चल रहा है। कई स्थानों पर संचालित होने के बाद वर्तमान में इसे भरसो के पंचायत सरकार भवन में चलाया जा रहा है, जहां सुविधाओं की भारी कमी है। यहां शाखा डाकपाल और सहायक शाखा डाकपाल के दोनों पद रिक्त हैं। वर्ष 2013 में डाकपाल के निलंबन के बाद से कामकाज प्रभार के भरोसे है, जबकि सहायक डाकपाल सेवानिवृत्त हो चुके हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि नए खाते खोलने का दबाव तो रहता है, लेकिन गबन की राशि के भुगतान में तेजी नहीं दिखाई जा रही। दस्तावेज वाले स्वीकृत मामलों में होगा भुगतान सलारपुर डाकघर में गबन का मामला हाल ही में संज्ञान में आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह मामला फिलहाल सीबीआई के स्तर पर है। जिन खाताधारकों के भुगतान को विभागीय स्वीकृति मिल चुकी है और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध हैं, उनके भुगतान की प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जाएगी।

मूल लेख पढ़ें

यह खबर bhaskar.com से ली गई है। पूरी खबर पढ़ने के लिए नीचे दिए बटन पर क्लिक करें।

पूरी खबर पढ़ें

और पढ़ेंराजनीति

सभी देखें →