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गंभीर मरीजों को रेफर करने में भी परेशानी, इमरजेंसी विभाग में मरीजों की लंबी भीड़ देखी गई
स्वास्थ्य

गंभीर मरीजों को रेफर करने में भी परेशानी, इमरजेंसी विभाग में मरीजों की लंबी भीड़ देखी गई

द
दैनिक भास्कर
26 सितंबर 2026
लेख सारांश

सदर अस्पताल सहित जिले के सभी अनुमंडलीय अस्पताल, रेफरल अस्पताल, पीएचसी/ सीएचसी सहित सभी सरकारी अस्पतालों में दूसरे दिन भी ओपीडी सेवा पूरी तरह प्रभावित रहा। स्थिति यह रहा कि दूसरे दिन भी हजारों मरीज सरकारी अस्पतालों से बिना इलाज के निराश लौट गए। दूसरे दिन सदर अस्पताल के ओपीडी भवन में सिविल सर्जन सह भासा के जिलाध्यक्ष डॉ हरेंद्र कुमार की अध्यक्षता में विशेषज्ञ चिकित्सकों व चिकित्सकों ने अपनी मांगों को रखा। इस मौके पर डॉ विनोद कुमार, भासा के जिला सचिव डॉ कुणाल कौशल, नेत्र सर्जन डॉ आकांक्षा कुमारी, मनोचिकित्सक डॉ श्रवण कुमार, गायनिक डॉ सुमन, सर्जन डॉ संजीत कुमार, डॉ नेहा, दंत चिकित्सक डॉ महारानी सहित दर्जनों चिकित्सक मौजूद थे। डॉ कुणाल कौशल ने कहा है जबतक हमारी मांगें नहीं मानी जाएगी तबतक ओपीडी बहिष्कार रहेगा। और जरूरत हुई तो इमर्जेंसी सेवा व पोस्टमार्टम कार्य भी बंद कर दिया जाएगा। मालूम हो कि भासा के अपील पर राज्य के अन्य जिलों की तरह ही मधुबनी में भी सदर अस्पताल, अनुमंडलीय अस्पतालों सहित अन्य सरकारी अस्पतालों में अनिश्चितकालीन ओपीडी कार्य बहिष्कार का शुक्रवार को दूसरा दिन था। किसी भी मरीज का निबंधन तक नहीं किया गया। सिर्फ इमर्जेंसी वाले मरीजों का ही उपचार किया गया। जिले के सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवा बंद रहने से हजारों मरीजों को निराश लौटना पड़ा। मालूम हो कि डीएमसीएच में भी चिकित्सकों का हड़ताल है। ऐसे में कुछ ऐसे गंभीर मरीज जिनको मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाना था वैसे मरीजों के परिजनों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। इसका फायदा कुछ बिचौलिए भी उठाए व गंभीर मरीजों को निजी अस्पताल में ले गए। कुछ निजी एम्बुलेंस चालकों व आशा कार्यकर्ता इमर्जेंसी विभाग के आसपास मंडराते हुए देखे गए। वहीं ओपीडी बंद रहने से इमरजेंसी विभाग में मरीजों की लंबी भीड़ देखी गई। आईसीयू, एसएनसीयू, लेबर रूम, इमर्जेंसी विभाग व ब्लड बैंक खुला हुआ था। ओपीडी कार्य बहिष्कार का मुख्य प्रभाव नियमित बाह्य रोगी सेवाओं पर रहा। गंभीर एवं आपात स्थिति वाले मरीजों के लिए आपातकालीन सेवाएं अलग व्यवस्था के तहत संचालित होती हैं। हालांकि, ओपीडी सेवा प्रभावित होने से सामान्य मरीजों को इलाज एवं चिकित्सकीय परामर्श के लिए असुविधा का सामना करना पड़ा। यदि ओपीडी सेवा लंबे समय तक प्रभावित रहती है तो नियमित उपचार लेने वाले मरीजों के चिकित्सकीय फॉलोअप में देरी हो सकती है। जांच एवं परामर्श प्रभावित होने के साथ ही सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों पर निर्भर आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को निजी स्वास्थ्य संस्थानों में इलाज कराने पर वित्तीय बोझ उठाना पड़ सकता है।

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