निगरानी एवं सामुदायिक जागरूकता से मजबूत होगा कालाजार नियंत्रण कार्यक्रम
जिले में कालाजार नियंत्रण कार्यक्रम को प्रभावी बनाने तथा मरीजों की समय पर पहचान एवं उपचार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुक्रवार को स्थानीय होटल में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। भारत सरकार एवं बिहार सरकार के दिशा, निर्देशों के आलोक में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के सहयोग से आयोजित कार्यशाला में डब्ल्यूएचओ के जोनल कोऑर्डिनेटर डॉ. दिलीप कुमार झा ने चिकित्सा पदाधिकारियों को कालाजार की पहचान, जांच, उपचार एवं रोकथाम से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान कालाजार मरीजों को मिलने वाली वित्तीय सहायता, आशा कार्यकर्ताओं की प्रोत्साहन राशि, कीटनाशक छिड़काव तथा उपचार के बाद मरीजों की नियमित निगरानी पर भी विस्तार से चर्चा की गई। प्रशिक्षण के दौरान डॉ. दिलीप कुमार झा ने बताया कि कालाजार लीशमैनिया डोनोवानी नामक परजीवी से होने वाला गंभीर रोग है, जो संक्रमित मादा बालू मक्खी के काटने से फैलता है। दो सप्ताह से अधिक समय तक बुखार रहना, वजन कम होना, कमजोरी तथा प्लीहा और यकृत का बढ़ना इसके प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं। ऐसे लक्षण वाले मरीजों की समय पर पहचान कर आवश्यक जांच एवं उपचार सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि संदिग्ध मरीजों में आरके, 39 जांच के माध्यम से कालाजार की पहचान की जा सकती है। प्रशिक्षण में रोग की पुष्टि, निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार उपचार तथा उपचार के बाद मरीजों की नियमित निगरानी की जानकारी दी गई। सिविल सर्जन डॉ हरेंद्र कुमार ने बताया कि प्रशिक्षण में कालाजार मरीजों को सरकार की ओर से मिलने वाली वित्तीय सहायता की भी जानकारी दी गई। बताया गया कि कालाजार से पीड़ित मरीजों को मुख्यमंत्री कालाजार राहत कोष से 6,600 तथा भारत सरकार की ओर से श्रम क्षतिपूर्ति के रूप में 500 की सहायता का प्रावधान है। इस प्रकार पात्र कालाजार मरीजों को कुल कालाजार नियंत्रण कार्यक्रम में आशा कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी चर्चा की गई। प्रशिक्षण में बताया गया कि कीटनाशक छिड़काव चक्र की पूर्वसूचना देने पर आशा कार्यकर्ताओं को 200 की प्रोत्साहन राशि का प्रावधान है। वहीं, संदिग्ध मरीज को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लाने और जांच में कालाजार की पुष्टि होने पर 100 दिए जाते हैं। इसके अतिरिक्त कालाजार मरीजों के उपचार के बाद अगले छह महीने तक नियमित देखरेख एवं फॉलोअप करने के लिए 500 की प्रोत्साहन राशि निर्धारित है। आशा कार्यकर्ताओं को घर, घर जाकर संदिग्ध मरीजों की पहचान करने, उन्हें जांच के लिए स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाने तथा उपचार पूरा कराने में सहयोग करने के महत्व की जानकारी दी गई।
जिले में कालाजार नियंत्रण कार्यक्रम को प्रभावी बनाने तथा मरीजों की समय पर पहचान एवं उपचार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुक्रवार को स्थानीय होटल में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। भारत सरकार एवं बिहार सरकार के दिशा, निर्देशों के आलोक में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के सहयोग से आयोजित कार्यशाला में डब्ल्यूएचओ के जोनल कोऑर्डिनेटर डॉ. दिलीप कुमार झा ने चिकित्सा पदाधिकारियों को कालाजार की पहचान, जांच, उपचार एवं रोकथाम से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान कालाजार मरीजों को मिलने वाली वित्तीय सहायता, आशा कार्यकर्ताओं की प्रोत्साहन राशि, कीटनाशक छिड़काव तथा उपचार के बाद मरीजों की नियमित निगरानी पर भी विस्तार से चर्चा की गई। प्रशिक्षण के दौरान डॉ. दिलीप कुमार झा ने बताया कि कालाजार लीशमैनिया डोनोवानी नामक परजीवी से होने वाला गंभीर रोग है, जो संक्रमित मादा बालू मक्खी के काटने से फैलता है। दो सप्ताह से अधिक समय तक बुखार रहना, वजन कम होना, कमजोरी तथा प्लीहा और यकृत का बढ़ना इसके प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं। ऐसे लक्षण वाले मरीजों की समय पर पहचान कर आवश्यक जांच एवं उपचार सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि संदिग्ध मरीजों में आरके, 39 जांच के माध्यम से कालाजार की पहचान की जा सकती है। प्रशिक्षण में रोग की पुष्टि, निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार उपचार तथा उपचार के बाद मरीजों की नियमित निगरानी की जानकारी दी गई। सिविल सर्जन डॉ हरेंद्र कुमार ने बताया कि प्रशिक्षण में कालाजार मरीजों को सरकार की ओर से मिलने वाली वित्तीय सहायता की भी जानकारी दी गई। बताया गया कि कालाजार से पीड़ित मरीजों को मुख्यमंत्री कालाजार राहत कोष से 6,600 तथा भारत सरकार की ओर से श्रम क्षतिपूर्ति के रूप में 500 की सहायता का प्रावधान है। इस प्रकार पात्र कालाजार मरीजों को कुल कालाजार नियंत्रण कार्यक्रम में आशा कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी चर्चा की गई। प्रशिक्षण में बताया गया कि कीटनाशक छिड़काव चक्र की पूर्वसूचना देने पर आशा कार्यकर्ताओं को 200 की प्रोत्साहन राशि का प्रावधान है। वहीं, संदिग्ध मरीज को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लाने और जांच में कालाजार की पुष्टि होने पर 100 दिए जाते हैं। इसके अतिरिक्त कालाजार मरीजों के उपचार के बाद अगले छह महीने तक नियमित देखरेख एवं फॉलोअप करने के लिए 500 की प्रोत्साहन राशि निर्धारित है। आशा कार्यकर्ताओं को घर, घर जाकर संदिग्ध मरीजों की पहचान करने, उन्हें जांच के लिए स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाने तथा उपचार पूरा कराने में सहयोग करने के महत्व की जानकारी दी गई।
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