नया मास्टर प्लान तैयार...:चौड़ी सड़कों पर साथ, साथ होंगे मकान और दुकान
भोपाल में सीलिंग से राहत के लिए व्यापारियों की उम्मीद नए मास्टर प्लान पर टिकी है। जानकारी के मुताबिक भोपाल मास्टर प्लान का ड्राफ्ट पूरी तरह तैयार है और इसके एक, दो दिन में जारी होने की संभावना है। ड्राफ्ट के मुताबिक अब अलग, अलग कमर्शियल और आवासीय लैंड यूज नहीं होगा, बल्कि पूरे भोपाल में मिक्स्ड लैंड यूज होगा। शहर में सड़क की चौड़ाई के हिसाब से यह तय होगा कि यहां पर कमर्शियल गतिविधि हो सकती है या नहीं। साथ ही मुख्य सड़क पर आवासीय बंगले और शोरूम साथ, साथ हो सकेंगे। ड्राफ्ट में 12 मीटर से अधिक चौड़ाई वाली सड़कों पर मिक्स्ड लैंडयूज के प्रावधान का प्रस्ताव है। लेकिन 12 से 24 मी. तक यह अनुमति सीमित होगी, जबकि 24 मी से अधिक चौड़ी सड़कों पर कारोबारी गतिविधि की पूरी अनुमति होगी। गौरतलब है कि 22 सितंबर को हुई सुनवाई में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मास्टर प्लान का ड्राफ्ट तैयार है। सरकार ने इसे प्रकाशित कर लोगों से दावे, आपत्तियां लेने की अनुमति मांगी। साथ ही कहा कि कोर्ट की अनुमति के बिना नए प्लान को अंतिम रूप नहीं दिया जाएगा। 12 मीटर से चौड़ी सड़कों पर मिक्स्ड लैंडयूज की तैयारी सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ड्राफ्ट प्रकाशन के बाद भी कार्रवाई मौजूदा नियमों से इधर सुप्रीम कोर्ट ने 22 सितंबर को हुई सुनवाई के बाद अपने ऑर्डर में कोर्ट ने मास्टर प्लान का ड्राफ्ट प्रकाशित करने की मंजूरी दी है, लेकिन स्पष्ट किया कि अभी किसी निर्माण की वैधता मौजूदा मास्टर प्लान व बिल्डिंग बायलॉज के आधार पर ही जांची जाएगी। अफसरों को सुनिश्चित करने को कहा कि जो क्षेत्र विशेष रूप से आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित हैं, वहां व्यावसायिक गतिविधियां न चलें। ऐसे क्षेत्र में कारोबार मिलता है तो परिसर को पहले सील किया जाएगा। हिदायत, सील कर फिर खोली, कोर्ट ने कहा, चुनिंदा कार्रवाई नहीं चलेगी सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी ने भोपाल का विशेष उल्लेख करते हुए बताया कि कुछ परिसरों को सील करने के कुछ घंटे या कुछ दिन बाद ही फिर खोल दिया जाता है। इस बीच न कारण बताओ नोटिस का जवाब आता है और न अधिकारी का कोई औपचारिक निर्णय। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को बिना भेदभाव के सीलिंग की कार्रवाई करने को कहा है। चुनिंदा कार्रवाई सामने आने पर उसने सख्त रुख अपनाने की चेतावनी दी है। कोर्ट में मुकदमा लंबित होना सीलिंग में बाधा नहीं सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक किसी जमीन या भवन के स्वामित्व या अन्य विवाद का कोर्ट में लंबित होना सीलिंग में बाधा नहीं बनेगा। यदि उसका उपयोग आवंटन के उद्देश्य या मंजूर नक्शे के विपरीत है, तो कार्रवाई होगी। पूरी तरह बिना मंजूरी बने निर्माण पर कानून के अनुसार सीलिंग या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई भी होगी।
मूल लेख पढ़ें
यह खबर bhaskar.com से ली गई है। पूरी खबर पढ़ने के लिए नीचे दिए बटन पर क्लिक करें।



